Authority Scam News : नोएडा विकास प्राधिकरण में एक बहुत बड़ा खेल सामने आया है। 100 करोड़ रुपये से अधिक की कीमत वाले बड़े कमर्शियल प्लॉटों पर बिल्डरों को जीएसटी भुगतान से बचाने के लिए 2022 से 2025 के बीच आवंटित 13 कमर्शियल प्लॉटों की रजिस्ट्री में हेरफेर की गई, जिससे सरकार को 200 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई हुई है। । CGST विभाग ने मामले की जांच पूरी करने के बाद दो बिल्डरों को भारी जुर्माने के साथ नोटिस भेजा है और नोएडा अथॉरिटी से भी प्रतिक्रिया मांगी है। 'गिफ्ट सिटी' नियम से छिपाया गया टैक्स इन कमर्शियल प्लॉटों की ई-नीलामी के अंतराल ब्रोशर में स्पष्ट रूप से जिक्र किया गया था कि इन पर 18% जीएसटी लगेगी। लेकिन नोएडा अथॉरिटी के कमर्शियल प्लॉट कार्यालय ने रजिस्ट्री के दौरान अधिकारियों की सहायता से इन प्लॉटों को 'आर्थिक सेवाओं के उपयोग' के रूप में दिखाया। वास्तव में, अहमदाबाद को 'गिफ्ट सिटी' घोषित करने वाली सरकारी अधिसूचना में वित्तीय सेवाओं से जुड़े प्लॉटों को जीएसटी से छूट दी गई है। जबकि इसके लिए कोई आधिकारिक अनुमोदन भी नहीं था, इस नियम का गलत फायदा उठाकर बिल्डरों को टैक्स बचाया गया। 12 दिन चली CGST रेड, बिल्डरों की अजीब दलील इस महाघोटाले की सूचना मिलते ही नोएडा अथॉरिटी के दफ्तर में 12 दिनों तक रहकर फाइलें और रजिस्ट्रियां खंगालीं। जब अथॉरिटी से पूछा गया कि कमर्शियल प्लॉट जमीन का उपयोग कब बदल गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने ऐसा कोई भी बदलाव करने से इनकार कर दिया। दूसरी ओर, टैक्स न चुकाने वाले बिल्डरों ने अजीब बहाना पेश किया कि अथॉरिटी ने जीएसटी की मांग ही नहीं की थी, इसलिए उन्होंने पैसे नहीं जमा किए। फिलहाल, अथॉरिटी के वित्त नियंत्रक ने जांच टीम को सभी 13 प्लॉटों और उनके खरीदार बिल्डरों के जीएसटी नंबर सौंप दिए हैं। विभाग अब इस बात की कड़ाई से जांच कर रहा है कि इस खेल के पीछे अथॉरिटी के कौन-से बड़े अधिकारी शामिल थे। ये भी पढ़े : नोएडा एयरपोर्ट पर कार्गो की सुरक्षा सख्त, हर सामान पर होगी पेनी नजर